तू ही बता ऐ बेवफा,
तेरी याद का मैं क्या करूँ,
तू ही बता ऐ बेवफा,
इस जज्बात का मैं क्या करूँ,
तू ही बता मैं क्या करूँ?
बता ना, मैं क्या करूँ?
क्या करून इस दिल का अपने,
जिसमे तेरी याद है,
क्या करूँ इन आँखों का पानी,
जिनको तेरा इंतज़ार है,
तू ही बता मैं क्या करूँ,
बता न, मैं क्या करूँ,
इस जज़्बात का मैं क्या करूं,
तेरी याद का मैं क्या करूँ,
बता न, मैं क्या करूँ,
ये दिल्लगी तेरे नाम की,
ये आशिकी तेरे नाम की,
ऐ दिलरुबा, ऐ जानेजां ,
ये दिल्लगी तेरे नाम की,
ऐ हम-सफ़र ये तो बता,
ये बिन तेरे किस काम की,
तू ही बता किस काम की,
बता ना किस काम की,
अब इस दिल्लगी का क्या करूँ,
इस आशिकी का क्या करूँ,
जीना मेरा दुश्वार है,
तेरे बिन ऐ जानेजां ,
तू ही बता अब इस जिंदगी का क्या करूँ,
बता न क्या करूँ,
मैं इस ज़िन्दगी का क्या करूँ,
कवि- मन्नू अनखिरिया
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